रविवार, दिसंबर 19

मेरी जीत या एक सुखद घटना

आज  तक की हर हार और जीत मैंने अपनी माँ के नाम की है.
इस वजह से नहीं की वो मेरी माँ है, बल्कि इस वजह से की आज तक जंहा-2 मुझे एक गुरु का आभाव खला, मैंने उसी  का चुनाव किया है.
मेरी माँ मेरी सची गुरु है.
आज यहाँ आप सबको उसकी कुछ बाते बताती हू

जब मैं कहती थी मम्मा सब बच्चे झूठ बोलते है, कि मैंने इतना ही पढ़ा है,
अगर वो पढ़ते नहीं तो नंबर कैसे आ जाते हैं?

मम्मा कहती बेटा तुम जितना पढ़ते हो उतना ही बताया करो .

 मैं पूछती क्यों   ?

तो वो कहती : तुम स्कूल विद्या ग्रहण करने जाते हो
और विद्या के नाम पर कैसा झूठ  .
बेटा मकसद पहला या दूसरा आना नहीं है, मकसद है की तुम कुछ sikho.
और इतनी छोटी छोटी बातो पर झूठ बोलोगे तो सच से सामना नहीं कर पाओगे
कभी नहीं समझ पाओगे एक सच्चे इंसान का आनंद
मै कभी भी तुम्हे पहला या दूसरा स्थान लाने को नहीं कहुगी ,
बस अच्छे नंबर लाने को कहुगी ,
मेहनत करने को कहुगी .

उस समय ये सब बातें समझ कम आती थी,
बस इतना जानती थी की माँ ने पढाई को लेकर झूठ न बोलने को कहा ह.
:)

जब भी पढ़ती, स्कूल जाते ही कहती की कल तो मैंने २ घंटे पढाई की थी.
और ये कहकर इतनी ख़ुशी होती थी
उस आन्नद कि तो जैसे आदत हो गई थी.

माँ की कही वो बाते
आज समझ आती है की उन्होंने हमे कैसे सबसे अलग और सच्चा बना दिया.

हाँ ये बात अलग है की इस दुनिया मे सच के साथ लड़ पाना बहुत कठिन है,
परन्तु एक बार जो सच के साथ जीने का आनंद चख ले उसे वो कठिनता प्रेरणा देती है.


कल जब मैंने अपने परसेंट देखे,
तो दिमाग मे ही नहीं आया की मैंने टॉप किया है,
बस ये था की पिछले सेमेस्टर से कम नहीं आने चाहिए नहीं तो मम्मी को बुरा लगेगा.
हाँ ये बात अलग है की मै चाहती थी की कुछ बचे जिन्होंने पिछली बार ज्यादा आने पर गलत तरीके से व्यव्हार किया था, जसे वो तो सबसे बड़े ज्ञानी हैं.
उनसे ज्यादा आये.
और शायद उसी चाहत की वजह से ये सब हुआ.

परन्तु आज भी मैं दुविधा मे हू कि
क्या सच मे ये मेरी जीत है?
या फिर बस एक रोजमर्रा की होने वाली अच्छी सुखद घटना?

आप सब लोगो का क्या कहना है?
मेरी माँ इसे क्या कहेगी?








1 टिप्पणी:

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल ने कहा…

सबसे पहले तो गुंजन बधाई परीक्षा/सेमेस्टर मे सर्वोतम आने के लिये। मैए जैसे पहले कहता आया हूँ वही दोहरा रहा हूँ 'मां के आंचल मे ब्रह्मांड छिपा होता है...