मंगलवार, सितंबर 20

गूंज हूँ मैं...

गूंज हूँ मैं...
जो गूंजती हैं,
लहरों की चाल से,
बदली की झंकार से!

गुंजन करना सिखा मैंने,
बचपन के संसार से!
पापा-मम्मी के दुलार से!
भाई के गुस्से के जवाब से!

गूंज हूँ मैं,
हवा में उड़ती मछलियाँ,
जमीन पर चलता चिड़िया का
झुण्ड.
२ दिन का बोलता बच्चा,
और २५ की उम्र में
तुतलाता इंसान>>>>
जो तुमने नहीं देखा कभी,
मेरी नजरो ने देखा सब!!

गूंज हूँ मैं<
तेरे हर गलत कदम पर उठा
सवाल हूँ<
तेरी गलती की माफ़ी है मेरे पास<
तेरे घमंड को चूर करने का चूरन
भी है!
तेरे ह्रदय के प्रेम का
गुब्बार हूँ>>>

गूंज हूँ मैं,
धरती माँ सा धीरज है<
तो दुर्गा जैसी खीज भी है!
नादान, नासमझ
कहते है कुछ लोग<
जिस रंग का चश्मा पहना है तुमने<
उसी रंग में रंगी है मेरी शक्ल!

गूंज हूँ मैं>>>>
गुंजन करते रहना है मेरा काम.....

@गुंजन झाझारिया copyright

4 टिप्‍पणियां:

Ravi kant yadav justiceleague ने कहा…

बहुत खूब आप मेरी रचना भी देखे ...........

gunjan jhajharia ने कहा…

jarur Ravi ji..dhanywaad...

Udan Tashtari ने कहा…

गूंज हूँ मैं>>>>
गुंजन करते रहना है मेरा काम..


-ऐसे ही गुँजती रहिये...शुभकामनाएँ.

गुंजन ने कहा…

धन्यवाद उड़न तश्तरी साहब...:)
अपना नाम तो डालिए..