रविवार, नवंबर 20

किनारे आ गयी 
समंदर की प्यारी लहरे ..
अब रेत कुरेदना ना गलती उनकी..
ढूंढ़ रही हैं अपने बोये सीप, और मोती!
अनजान सी दुनिया उनके लिए है>>>
हर एक आवाज "गुंजन" उन 
बातो का फ़साना कहती है!!!

4 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मन के सुंदर भाव....

सुमित प्रताप सिंह Sumit Pratap Singh ने कहा…

आपने बुलाया और लो हम चले आये...
यूं ही लिखते रहिये...

गुंजन ने कहा…

धन्यवाद मोनिका जी

गुंजन ने कहा…

सुमित जी आभार आपका.
आप यूँ ही आते रहिये!
और पढ़ते रहिये, हम लिखते रहेंगे!