शुक्रवार, दिसंबर 16

मेरा सैनिक जाग रहा!

निकला जब था घर से वो,
तब से ही माँ ने पूजा-पाठ किया!
एक बार और सही सलामत देखूं उसको,
बस इतना वरदान लिया!

कच्ची -कच्ची हथेलियों ने
सीना तान कर लड़ने की कसम जब खाई थी!
जज्बे और हिम्मत के आगे
पूरी दुनिया ने दांतों तले ऊँगली दबाई थी!


जब माँ से जाते देखा ना गया,
रसोई में सुबकने चली गई थी !
और पिता ने गले लगाया था,
जब तू लौट कर आएगा,
तब पुष्पों की वर्षा करवाऊंगा!
ढोल नगाड़े बजवाऊंगा
और गूंज उठेगा एक ही नाम चारो दिशाओ में!
तब मैं फक्र से सर उठाऊंगा!

हुंकार भरी और चला गया,
फिर ना मुड कर देखा कभी,
अपने क्या हैं ?
क्या हैं रिश्ते?
सब परिभाषा का एक अर्थ उसने जाना,
भारत माँ , भारत माँ,
बस भारत माँ का जाप रटता,
 हर अंधड़ से लड़ जाता था!

ना ठण्ड की कोई फिक्र थी,
ना गर्मी का अहसास था!
ना पानी की प्यास थी,
ना जिव्हा से कोई प्यार था!

गोलियों से, बन्दूको से,
लाठी और पत्थर से,
दोस्ती इतनी गहरी थी ..
चाहे चढ़े चढ़ाई वो,
चाहे दौड़े दौड़..
पीठ पर थैलों में भर के भागता जाता था!

दुश्मन को सुंघा दुर्गंद से,
बिन देखे ही उसकी आहट भांप गया!
हर बच्चा सुकून से सोता था!..
कहता था--
मुझे क्या डर ? जब मेरा सैनिक जाग रहा !

हुई मुठभेड़ भी भयानक थी!...
भयंकर सिंघनाद  हुआ ...
एक गोली उसको लगी थी ,
साथी चले दवा करवाने...

दवा की फिक्र नहीं थी उसको,
सोचा ---
देश सोया है चैन से, किसी की नींद ना खुल जाए!
गलती से भी कोई अनजाना मेरे वतन में ना घुस पाए!
लगती गई गोलिया,
छलनी करती रही छाती ...
दागता रहा गोले वो भी...

अंत किया दुश्मन का....
जीत गया था संग्राम!
लेकिन चीथड़े ही मिले उसके,

माँ ने जब देखा तिरंगा...
आँखों में अश्रुधारा थी!
उस समंदर
को कैसे निकाले ह्रदय से?

पिता ने भीगे नैनो से
पुष्पों की वर्षा करवाई,
ढोल-नगाड़े भी बजवाये!
क्यों ना हो --
उनका जवान जो लौटा था!

लोगो का हुजूम उमड़ा...
उस महान देशभक्त के दर्शन को..
अरे कोई माँ को समझाओ...
तू तो सबसे खुशनसीब है,
जो तेरा बेटा शहीद हुआ!
किसको मिलती है, ऐसे विदाई?
तेरे बेटे को लेने तो खुद जन्नत है चलकर आई!

आज भी सोये हैं बच्चे चैन से मेरे देश के...
कहते हैं--
मुझे क्या डर  ?
 जब मेरा सैनिक जाग रहा !

जय हिंद!
जय भारत !

विजय दिवस की शुभकामनाये!
शहीदों को नमन!

गूंज झाझारिया