मंगलवार, जुलाई 17

करवा अपनी जय

अनभिज्ञ रहे अभिमन्यु, चक्रव्यूह तोड़ने के राज से,
भूल गए थे हनुमत शक्ति सारी, एक छोटे से श्राप से..
अर्जुन भी भावुक हुए, अपनों संग युद्ध के विचार से..
प्रभु राम भी बिलखे थे, सीता के ख्याल से..
ना तुझसे भूल हो ,ना तू भूले,,
ना रोये, ना ही सिसके किसी भी हार से..
ये कैसे सोच लिया तुने,

तेरा लहू ना बहे किसी पत्थर के वार से...
बहना, गिरना, सब होता है चलने की रफ़्तार से..
समय ना गंवाना, खुद पर सवालों की बौछार से..
तू शक्ति है..तू भी जाने है सारे भेद..
खोल अपना तीसरा चक्षु, बचा खुद को अंधेरो के प्रहार से...
आँख पर ध्यान लगा, भरा भण्डार खोल दिखाना होगा..
सारी ताकत लगा, जुट जा जी-जान से...
उठ खड़ा हो, करवा अपनी जय जय सारे संसार से..
गूंज झाझरिया