शुक्रवार, जुलाई 20

तेरी मेहनत नए आयाम छु जायेगी

अधरों पर एक मुस्कान छुट जायेगी..
सपनो में तेरे नयी जान फूंक जायेगी..
तू चलते रहना राही,
तेरी मेहनत नए आयाम छु जायेगी..

बैठना नहीं इंतज़ार की छांव में तुझको,
जलना तपिश में,
बरसात में बहना होगा..
जब सारी ठिठुरन तेरी रंगों में उतर आएगी..
तेरी मेहनत नए आयाम छु जायेगी..

यह एक दौड है साबित करने की..
दुनिया को पीछे छोड,
आगे निकलने की..
सबके दिलो में जब तेरी छाप छुट जायेगी..
तेरी मेहनत नए आयाम छु जायेगी...
Copyright @गुंज झाझरिया

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

यह एक दौड है साबित करने की..
दुनिया को पीछे छोड,
आगे निकलने की.
..... सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है!