मंगलवार, जुलाई 3

मैं एक छोटी सी चिड़िया

इतनी सारी आबादी में,
मैं एक छोटी सी चिड़िया हूँ..
मन में प्यार लिए डोलूं,
मैं आंगन की बिटिया हूँ...
मुस्कराहट गुँथी है माँ की,
मेरी चुटिया में...
मैं बाबा का प्यारी मुनिया हूँ...
रौनक बनती हूँ दीवारों की,
मैं तीज-त्यौहार की फर्रियां हूँ..
भाई-भतीजे अधूरे बिन मेरे,
मैं भाभी के साज की डिबियाँ हूँ..

इतनी सारी आबादी में,
मैं एक छोटी सी चिड़िया हूँ..

घर की छोडो, मोहल्ले की सुनो..
सुबह सवेरे देंखे सब जो ,
मैं उस ललाई की मुखिया हूँ..
पड़ोस की दादी जब चल नहीं पाती.
मैं ही उनका चीटिया हूँ..
सबको इज्ज़त-सम्मान बाँटती,
मैं खुशियों की पुडिया हूँ...

इतनी सारी आबादी में,
मैं एक छोटी सी चिड़िया हूँ..

दिन भर अकेली डोलू मैं,
सखियाँ नहीं हैं मेरे पास..
मैं मोहल्ले की इकलोती गुडिया हूँ..
कब आएगी मेरे साथ खेलने वाली?
मैं अकेली सोनचिरैया हूँ..
न मारो बेटियों को मोहल्लेवालो ..
पूछो माँ-बाबा से,
कितनी अनमोल हूँ मैं..
वो कहते हैं..
मैं पाप धोने वाली टिकिया हूँ...
इतनी सारी आबादी में,
मैं एक छोटी सी चिड़िया हूँ..
मुस्कराहट गुँथी है माँ की,
मेरी चुटिया में...
मैं बाबा का प्यारी मुनिया हूँ..
मन में प्यार लिए डोलूं,
मैं आंगन की बिटिया हूँ...
copyright© गुंज झाझारिया 

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......!!!!!