शुक्रवार, अगस्त 24




स्वप्न के धरातल पर चाहे जितने कंकड आयें..
मुझे बस चलते जाना है..
सुना है कहीं दूर, इसी राह पर परियों से सामना होता है...
मुझे बस चलते जाना है....

copyright-गूंज झाझारिया 

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