बुधवार, सितंबर 19

गन्नू जी बैठे हो आराम से?


ओम गन गणपतये नमः...

गन्नू जी बैठे हो आराम से?
मसंद और लगाऊ क्या??
लडू तो लायी हूँ,
नमकीन भी मंगवाऊ क्या??
देखो आपकी गज भर की सूंड को,
कैसे इठलाती है..
एक दन्त के ऊपर भी नाच दिखाती हैं..
मैं क्यों कम पाकर भी ना इतराऊ??
गन्नू जी बुधि तो खूब है ,२ बड़े कानो में..
तो दूर से सुन लो ना मेरी बात..

गन्नू जी बैठे हो आराम से?
रिधि सिधि कैसी हैं??
उनके लिए भी दरबार लगाया था..
हर बार कहते हो,
लाऊंगा अगली बार...
अब उनके बिना,
कैसे सजाऊँ मुकुट सोने का??
ऐश्वर्य बिना कैसे जीऊँगी बाप्पा,
आप अपने हिस्से का चाहें दे जाना...


गन्नू जी बैठे हो आराम से?
अच्छा जो भी हो,
इस बरस मुझे कुछ ऐसा दे जाना,,
झप्पर फाड़ दूँ जिससे...
और अगर नहीं दे पाओगे..
तो जाने नहीं दूंगी मैं..
कस कर पकड़ लुंगी अपने साथ..
आप भी रहना मेरे साथ फिर ,
लड्डू तो रोज खिला दूंगी..
बस लड्डू कहाँ से आयेंगे,
वो राह दिखा देना..;)

गन्नू जी बैठे हो आराम से?
थोड़ी सी हरी दूब खिलाऊं क्या?
जो चाहें अभी कह देना...
१० दिन हैं अभी ,,,
चाहें रोज नया भोजन कर लेना..
बस दे जाना ऐसा कुछ..
दुनिया हिला दूँ जिससे....,
जाने से पहले कह जाना ऐसा कुछ,
तारे तोड़ लाऊं कैसे?

गन्नू जी बैठे हो आराम से?
मसंद और लगाऊ क्या??

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