रविवार, अक्तूबर 7

बशर्ते तुम मुझे अपना कहो...



बशर्ते तुम मुझे अपना कहो...
वीरानियों में मेरी तन्हाई से ज्यादा,
तुम मेरे करीब रहो..

बशर्ते तुम मेरे अहसासों का जमीर बनो...
मेरी लाल रक्त धाराओं में बहते लहू की गति को,
घटता-बढ़ता तुम देख सको..

मैं तैयार हूँ,
तुम्हारे कदमो का निशाँ बनने को,


तुम्हारे माथे का तेज बनकर,
तुम्हारी आखो में चमकने को....

बशर्ते धरती से एक तार इलास्टिक का,
जो कम ज्यादा होता हो..
जोड़े रखे मुझे तुमसे..
मेरी गलतियों पर,
उन नतीजों से
वाकिफ करवा सको..

मैं तैयार हूँ,
तुम्हारी जड़ो की माटी बनकर
तुम्हें बांधे रखने को..
तुम्हारे ऊपर बदली बनकर ,
तुम्हें पानी देने को..

बशर्ते तुम सुर दो मेरे संगीत को,
हर शाम मेरे बालों में गजरा
सजाने का वादा करो...

तो, मैं तैयार हूँ..
तुम्हारे नाम के आगे ,
अपना नाम लगाने को,..
मैं तैयार हूँ,
तुम्हारा उम्र भर साथ निभाने को....

@गुंज झाझरिया..