शुक्रवार, दिसंबर 27

बदलाव

क्या लिखे तू गरीबी, बीमारी।
लेखनी तेरी क्यों डूबे दर्द में।
तार लिख, बाँटने को।
सार आत्मसात करने को।
वो भाव मुर्दे में जान फूंके,
हाथ थामे, भटके का।
पावन अहसास लिख।
लिखना है,
तो,
उंचाई, जूनून,ख्वाईश लिख,
मेहनत का रंग लिख।
धैर्य और उमंग लिख।
कह दे अपनी कलम से,
हो गई है हालत बदतर,
अब तो बचाव लिख।
बस बदलाव लिख।।
गुंज झाझारिया

6 टिप्‍पणियां:

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : रंग और हमारी मानसिकता

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (28-12-2013) "जिन पे असर नहीं होता" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1475 पर होगी.
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
सादर...!

Onkar ने कहा…

बहुत खूब

Reena Maurya ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना...
http://mauryareena.blogspot.in/
:-)

गुंज झाझारिया ने कहा…

आभार आप सभी का।। देरी के लिए माफ़ी।। बीच में कुछ समय व्यस्त थी।। आशा है आपका विश्वास यूँ ही बना रहे अहसास के प्रति।

गुंज झाझारिया ने कहा…

आभार आप सभी का।। देरी के लिए माफ़ी।। बीच में कुछ समय व्यस्त थी।। आशा है आपका विश्वास यूँ ही बना रहे अहसास के प्रति।