बुधवार, मई 28

भूत-भविष्य

भूत जाता नहीं,
आस-पास रहता है।
कभी मुस्कुराहट बनकर,
और कभी,
भौचंका कर देने वाला,
असत्य बनकर।
जो सत्य नहीं है,
पर सत्य बन जिया सदा,
वो सत्य से भी अधिक,
तकलीफ़दायक है।
निगलना नहीं,
भूलना नहीं,
गाँठ बाँध रखना साथ,
वो सत्य का चोगा पहने असत्य,
मजबूत बनाएगा तुम्हें।
सत्य से असत्य की लड़ाई में,
जब सत्य की डगर कठिन लगेगी।
हारने नहीं देगा,
वो असत्य,
जो भूत बिगाड़ चूका है,
भविष्य वही संवारेगा।
© Gunjan Jhajharia

1 टिप्पणी:

RavindraPandey ने कहा…

निश्चय ही भविष्य संवारेगा...